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|| श्रीदत्तगुरुकरुणाष्टक ||

04 जनवरी

|| श्रीदत्तगुरुकरुणाष्टक  ||

दत्तात्रेया तव शरणम् | दत्तनाथा तव शरणम् ||

त्रिगुणात्मका त्रिगुणातीता | त्रिभवनपालक तव शरणम् || १||

शाश्वतमूर्ते तव शरणम् | श्यामसुंदरा तव शरणम् ||

शेषाभरणा शेषभूषणा | शेषशायी गुरु तव शरणम् ||२||

षड्भुजमूर्ते तव शरणम् | षड्भुज यतिवर तव शरणम् ||

दंडकमण्डलु गदापद्मकर शंखचक्रधर तव शरणम् ||३||

करुणानिधे तव शरणम् | करुणासागरा तव शरणम् ||

श्रीपादश्रीवल्लभ गुरुवर, नृसिंहसरस्वती तव शरणम् ||४||

श्रीगुरुनाथा तव शरणम् | सद्गुरुनाथा तव शरणम् |

कृष्णासंगमी तरुतलवासी भक्तवत्सला तव शरणम् ||५||

कृपामूर्ते तव शरणम् | कृपासागरा तव शरणम्|

कृपाकटा़क्षा कृपावलोकना कृपानिधे प्रभु तव शरणम् ||६||

कालांतका तव शरणम् | कालनाशका तव शरणम्

पूर्णानंदा पूर्णपरेशा पुराणपुरुषा तव शरणम् ||७||

जगदीशा तव शरणम् | जगन्नाथा तव शरणम् ||

जगत्पालका जगदाधीशा, जगदोद्धारा तव शरणम् ||८||

अखिलांतरा तव शरणम् | अखिलैश्वर्या तव शरणम् ||

भक्तप्रिया वज्रपंजरा प्रसन्नवक्त्रा तव शरणम् ||९||

दिगंबरा तव शरणम् | दीनदयाघन तव शरणम् ||

दीनानाथा दीनदयाळा, दीनोद्धारा तव शरणम् ||१०||

तपोमूर्ते तव शरणम् | तेजोराशी तव शरणम् ||

ब्रह्मानंदा ब्रह्मसनातन, ब्रह्ममोहना तव शरणम् ||११||

विश्वात्मका तव शरणम् | विश्वरक्षका तव शरणम् ||

विश्वंभरा विश्वजीवना | विश्वपरात्पर तव शरणम् ||१२||

विघ्नांतका तव शरणम् | विघ्ननाशका तव शरणम् ||

प्रणवातीता प्रेमवर्धना | प्रकाशमूर्ते तव शरणम् ||१३||

निजानंदा तव शरणम् | निजपददायका तव शरणम् ||

नित्य निरंजन निराकारा निराधारा तव शरणम् ||१४||

चिद्घनमूर्ते तव शरणम् |चिदाकारा तव शरणम् ||

चिदात्मरूपा चिदानंदा |न चित्सुखकंदा तव शरणम् ||१५||

अनादिमूर्ते तव शरणम् | अखिलावतारा तव शरणम् ||

अनंतकोटि ब्रह्मांडनायका | अघटितघटना तव शरणम् || १६ ||

भक्तोद्धारा तव शरणम् | भक्तरक्षका तव शरणम् ||

भक्तानुग्रह गुरुभक्तप्रिया | पतितोद्धारा तव शरणम् ||१७ ||

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4 responses to “|| श्रीदत्तगुरुकरुणाष्टक ||

  1. Gajendra Patidar Susari (Dhar) MP

    नवम्बर 21, 2012 at 9:55 पूर्वाह्न

    श्री गुरु दत्ता जय भगवंता ते मन निष्ठुर न करी आता. (प. पू. वासुदेवानंद सरस्वती स्वामी महाराज विरचित करुणा त्रिपदी भी यदि इस संकलन में होती तो भक्त गण धन्य होते, साधुवाद………)

     
  2. drpankaj patel

    मई 12, 2011 at 9:33 अपराह्न

    jay shree krishna

     
  3. rajyogi255

    जनवरी 9, 2011 at 12:07 अपराह्न

    Khup ch chan..Dhanyawad..

     

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