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बा की अनुकम्पा

07 जनवरी


दीक्षा दिन के उपलक्ष्य पर प.पू. प्रभु बा  का मनोगत

(प्रभु बा क़ा दीक्षा दिवस ७ जनवरी को है| ‘बा’ की दृष्टि से यह दिवस उनके पुनर्जन्म क़ा प्रतीक है, इसी दिन अपने सद्गुरुदेव पूज्य योगीराज श्री गुळवणी कहाराँ से शक्तिपात दीक्षा क़ा प्रसाद पाया था| इस प्रसाद का आसवादन वे अनेक पात्रा साधकों को कराने में कल्याणरत हैं| सम्पर्कित वा कृपापात्र आराधक का बाह्य-यात्रा से आभ्यंतर यात्रा की ओर उन्मुखीकरण ‘बा’ क़ा करूण स्वभाव है | इस महत्त्वपूर्ण दिवस पर प.पू. परमहंस स्वामी  सुगंधेश्वरानंद जी (राजयोगी ‘प्रभु बा’ ) द्वारा अपने प्रियपात्री को प्रदत्त संदेश यहाँ अविकल प्रस्तुत है |)

||श्री सद्गुरुनाथ महाराज की जय ||

मेरे प्रिय साधक,

गुरु कृपा अनंत है | गुरु परंपरा महान है| गुरु सिद्धमार्ग का आधार है| मैं स्वयं सिद्ध कृपा से अनुप्रणित हूँ | इस सिद्ध परंपरा की शुभ शुरुआत परमपिता शिवात्मा सद्गुरु श्री दत्तात्रेय जी से होती है| मेरे प्रिय आत्मन्, तुम्हारे जीवन का आधार भी सिद्धकृपा ही है| इस कृपा के अवलंबन से तुम्हें महान बनना है, सिद्ध होना है| तुम्हारा धर्म, तुम्हारा इष्ट महान है इसीकारण से तुम्हारा और मेरा मिलन इस चैतन्यस्वरूप परंपरा में हुआ है |

बना दो बुद्धिहीन भगवान
भुला दो ज्ञान और विज्ञान
पूरो ह्रदय भक्ति और श्रद्धा से,
मुझे तुम दे दो प्रेम का दान |

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पूर्वप्रसिद्धी शिवप्रवाह जाने २००७

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One response to “बा की अनुकम्पा

  1. Chandrakant

    अक्टूबर 18, 2012 at 9:48 अपराह्न

    Om Shree Gurudev Datta.

     

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