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साधनचतुष्टय

14 जनवरी

ब्रह्मसूत्र शांकरभाष्य में तथा विवेक चूडामणि इस ग्रंथ में शंकराचार्य इसकी चर्चा करते है|

साधन-चतुष्टय – मोक्षावस्था की अनुभूति के लिये चार साधनों के समूह के रूप मे साधन चतुष्टय बतलाए गये हैं-

  1. नित्यानित्य वस्तु विवेक : अर्थात् , नित्य एवं अनित्य तत्त्व का विवेक ज्ञान,

  2. इहमुत्रार्थ भोगविराग : जागतिक एवं स्वार्गिक दोनों प्रकार के भोग-ऐश्वर्यों से अनासक्ति,

  3. शमदमादि षट् साधन सम्पत् – शम, दम, श्रद्धा, समाधान, उपरति, तितिक्षा, आदि छः साधान सम्पत्तियों से युक्त होना,

  4. मुमुक्षत्व – मोक्षानुभूति की उत्कण्ठ अभिलाषा,

उपरोक्त साधन मोक्ष प्राप्ति में सहायक कहे गये है।

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2 टिप्पणियाँ

Posted by on जनवरी 14, 2011 in Foot Notes

 

2 responses to “साधनचतुष्टय

  1. Raj

    जनवरी 15, 2011 at 5:05 पूर्वाह्न

    Chidanand Rupah SHIVOHAM…..SHIVOHAM

     
  2. jayantijain

    जनवरी 15, 2011 at 3:37 पूर्वाह्न

    really

     

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