RSS

मंत्र जाप की महिमा

24 मार्च

मंत्रों की महिमा अपरम्पार है। सत्संग, साप्ताहिकी आदि में साधक  ‘ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हैं। यह मंत्र मन में शुचिता की प्रतिष्ठा करते हुए समग्र पापों का विनाश करता है । ‘ नम: शिवाय’ का पंचाक्षरी मंत्र सर्वकल्याण के साथ -साथ गुरुकृपा प्रदाता है। गुरुपूर्णिमा से दत्त जयंती तक इसका जाप करते हुए सद्गुरुदेव को समर्पित करने से सर्वसिद्धि मिलती है।’ श्री राम जय राम जय जय राम’ मंत्र का जाप अन्नाहार से पूर्व करने से अन्न पावन व पुष्टिवर्धक हो जाता है । ‘दिगम्बरा दिगम्बरा श्रीपाद वल्लभ दिगम्बरा’ , ‘हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे कृष्ण  हरे हरे ‘ , ‘विठ्ठल विठ्ठल ‘ आदि मंत्रों के साथ कीर्तन करने से परमात्मा के चरणों में अनुराग बढता है । सद्गुरु द्वारा दिए गए मंत्र में उक्त सभी विलक्षणताएं समाहित होती हैं। अत: उसका जाप सर्वग्राह्य है । शर्त यही है कि गोपी भाव से गुरु मंत्र का जाप चले ।

जो साधक जप व ध्यान की महिमा से अज्ञ होते हैं, उनका मनोयोग से जप व ध्यान नहीं हो पाता । या तो उन्हें निद्रा अपने आगोश में लेने लगती है या शारीरिक रूप से असहजता अनुभव कर आसन से उठ खडे़ होने की चाह बलवती होने लगती है। कोई बलात् या संकोचवश बैठा भी रह जाता है तो उसका यांत्रिक जाप ही चलता है मन तो सांसारिक विषयोंके  प्रवाह में बहने लगता है । ऐसा साधक कुछ समयोपरांत ऊब कर साधना को अलविदा कह देता है । जो इस संभावित संकट की घाटी को संकल्प व सजगता से पार कर लेता है वह परमात्मा के आनंद से सराबोर हो उठता है ।

हमारा सम्पूर्ण आध्यात्मिक वाङ्मय इसके प्रमाणों से भरा पडा है। बालक प्रल्हाद ने मंत्र जाप की शरण ली तो विष, अग्नि , काल आदि भी उसका बांल तक बांका नहीं कर सके। अंतत: उसकी रक्षार्थ स्वयं नारायण को नृसिंह रूप में आकर ’परित्राणाय साधूनाम्, विनाशाय च दुष्कृताम्’ का वचन निभाना पडा।  भक्त ध्रुव ने मंत्र का आश्रय लिया तो उसे परमात्मा की गोद में अटल स्थान मिला । मंत्र के प्रभाव से समुद्र में पत्थर तैरने लग गए और सम्पूर्ण रामदल जल सागर से ही नहीं संसार सागर से भी पार हो गया। भक्तमती मीराबाई नाम संकीर्तन के प्रताप से ज्योति बनकर स्वयं श्री कृष्ण में समाहित हो गई। संत तुकाराम नाम जपते जपते परमपद को पा गये । ऐसे असंख्य आख्यान हैं जो नाम जप की महिमा मुखर करते हैं। वास्तव में मंत्र साधना हेतु तुम सब भी सद्पात्र हो| बस संकल्प कर लो, ल़क्ष्य को वर लो|

—तुम्हारी अपनी बा

पूर्वप्रसिद्धी शिवप्रवाह ऑगस्ट २००७

back to सद्गुरुसंदेश

 

back to Guruvanee

 

Advertisements
 

3 responses to “मंत्र जाप की महिमा

  1. madhavilimaye

    मार्च 24, 2011 at 7:16 अपराह्न

    very nice!

     
  2. स्वागता

    मार्च 24, 2011 at 9:06 पूर्वाह्न

    That sounds great!

     
  3. rani

    मार्च 24, 2011 at 9:02 पूर्वाह्न

    Jai Shri Krishna,
    With PP Prabhu Baa’s Blessings we are having these Satsangs,12 hr chants and on going Mantra Japa Hundi. Anyone is welcome to participate. You can contact us at admin@yogayog.net or thru this blog. Welcome!
    Jai Shri Krishna,

     

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: