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अखण्ड नाम जप महिमा

17 मई

सबसे श्रेष्ट साधन है ध्यान और ध्यान का आधार है नाम-जप । नाम- जप चलता फ़िरता परमात्मा है । ध्यान तो दिन में दो घण्टे ही करना होता है, शेष समय में नाम जप ही सुलभ व श्रेष्ठ साधन है । इसमें भी अखण्ड नाम जप की महिमा तो अतुलनीय है । नाम – जप ईश्वरीय शक्ति का आहार है । जैसे हम अतिथि को प्रसन्न करने के लिए स्वादिष्ट पक्वान परोसते हैं, वैसे ही ईश्वर को, हमारी शक्तिस्वरूपा गुरुपरम्परा को रिझाने के लिए एकाग्रचित्त से, पूरे श्रद्धाभाव से, लय- तालपूर्वक किया गया नाम-जप बहुत श्रेष्ठ आध्यात्मिक भोजन है । जहां- जहां साधकों द्वारा अखण्ड नाम – जप होता है, ईश्वर व श्री सद्गुरुदेव का परिभ्रमण वहां अवश्यमेव होता है ।

यही नाम- जप जब एक लय व ताल में हो तो धुन कहलाता है । मधुर धुन सुनने – करने के लिए तो बड़े बड़े योगी भी लालायित रहते हैं । जहां ऐसी मर्मस्पर्शी धुन  हो वहां वे अपनी तपस्या को भी कुछ समय स्थगित कर धुन में झूमने लगते हैं, धुन को आत्मसात करते रहते हैं । ऐसी धुन जब हमारे कानों द्वारा भीतर प्रविष्ट होती है तो हमारा मन मयूर नाचने लगता है, आनंद की फ़ुहार से हम सराबोर हो जाते हैं । जब हम नामधुन करते हैं तो प्रथम हमारी वाणी पवित्र होती है, इसके बाद अंतर्मन का शुद्धीकरण होता है जिससे हम सकारात्मक ऊर्जा के धनी बनते चले जाते है ।

नामधुन एक अलौकिक आनंद की जननी है। इसमें डूबने के लिए आवश्यक है कि जपकर्ता अपने आपको उसमें विलीन कर दे । हर चिन्ता व हर विचार को विराम दे दे। हर प्रकार की बातों से मुक्त हो जाए, यहां तक कि स्वयं के बारे में भी चिंतन करना छोड़ दें । अपने आसपास, आगे पीछे कौन है? क्या कर रहा है? यह भी ध्यान में न आए । आसपास के वातावरण से मुक्त होते ही अनुभव होने लगेगा कि हम परमात्मा की शरण में हैं और उसी के लिए गा रहे हैं । हमारी वाणी को उस तक पहुंचाना ही उपादेयता है । हम अपने लिए नहीं, दुनिया के लिए नहीं , बस अपने परमात्मा के लिए ही गा रहे हैं । हम अपनी वाणी और किसी को नहीं शिवस्वरूप, वासुदेवस्वरूप श्री सद्गुरुदेव को ही सुना रहे हैं ।

सच तो यह है कि जब ऐसी तल्लीनता और भाव आ जाएगा तब किसी भी क्षण खुली आंखों से उनके दर्शन हो जायेंगे । वही क्षण परमात्मा की अनुभूति करवाएगा। आप में एक विलक्षण दिव्यता का उदय होगा । वह दिव्यता आपके जीवन को आलोकित कर देगी । जीवन की सार्थकता सिद्ध हो जायेगी, परम्परा का प्रयोजन सिद्ध हो जाएगा, सद्गुरु की मेहर बरसने लगेंगी । आप एक अनूठे अहोभाव से परिपूरित हो जायेंगे । अब तक का सुना और सीखा सैद्धांतिक अध्यात्म प्रत्यक्ष घटित होने लगेगा।

मैंने नामधुन से इन अनुभूतियों का आनंद लिया है, इसलिए मैं पूरे विश्वास से कहती हूं कि आप सब भी ऐसा कर सकते हैं । जय श्री कृष्ण ।

                                         —–आपकी अपनी बा

पूर्वप्रसिद्धी – शिवप्रवाह फ़रवरी 2011

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One response to “अखण्ड नाम जप महिमा

  1. jaibir

    जून 11, 2016 at 9:50 अपराह्न

    nam tabhe sarthak he jab chombakey

     

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