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अध्यात्म और विज्ञान

07 जुलाई

एक होता है स्थूल शरीर, एक होता है सूक्ष्म शरीर । स्थूल शरीर के बारे में विज्ञान अधिक जानता है और सूक्ष्म शरीर के बारे में अध्यात्म। विज्ञान और अध्यात्म के क्षेत्र यों तो विलग विलग दिखाई देते हैं, दोनों अलग-अलग अपना अस्तित्त्व भी दिखाते हैं पर इनका समन्वय हो जाए तो सोने में सुहागा हो जाता है ।

ध्यान और श्वास को विज्ञान मानें या अध्यात्म या दोनों को दोनों, यह तर्क का, विवाद का विषय हो सकता हैं, पर जो इनको साध लेते हैं, उनके लिए ये वर्गीकरण निरर्थक हो जाते हैं। सत्य तो यह है कि श्वास है वह द्वार जो ध्यान के पास ले जाता है। द्वार बंद है तो भीतर जाना कठिन है। श्वास को नहीं साधा तो ध्यान लगना कठिन है।  श्वास सधी तो ध्यान स्वत: लगना ही है। यदि किरण पकड़ में आ गई तो सूर्य तक पहुँचना सहज हो जाता है।

श्वास स्थूल है, सरलता अनुभवित होती है, इसका निरीक्षण थोड़े प्रयास से संभव है, इसके प्रति सजगता आ जाए तो ध्यान तक की यात्रा भी सरल हो जाती है। स्थूल से सूक्ष्म तक का राजमार्ग दिखाई देने लगता है । जीवन की सार्थकता लगने लगती है । वृत्तियां उर्ध्वगामी होने लगती हैं।

अनुभवी संकेत करते हैं कि दोनों का समन्वय ऐसा सृजन करता है जिस पर जीवन की सफ़लता का परचम लहरता है। सोचें, साधें, बतायें।

—-सं. वरदीचन्द राव.

पूर्वप्रसिद्धी शिवप्रवाह अप्रैल 2007.

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2 responses to “अध्यात्म और विज्ञान

  1. Prof Prakash Khadilkar

    जुलाई 12, 2011 at 2:12 अपराह्न

    विज्ञान ही अध्यात्मशास्त्र है। ध्यान का मार्ग हमे योगशास्त्रसे प्राप्त होता है जिसका चौथा अंग है प्राणायाम व छटा अंग है ध्यान।
    विज्ञान मे अनुसंधान, बिना ध्यान के, असंभव है।

     
  2. jayantijain

    जुलाई 9, 2011 at 2:08 अपराह्न

    Like they are two eyes of a person, as Einstein said .

     

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