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मैंने शिव चलते देखा है ….व. राव.

12 अगस्त

परमहंस पूज्य प्रभु बा के सान्निध्य में इस श्रावण में निरंतर पूरे मास शिव-त्रिशूल, उदयपुर में पार्थेश्वर पूजा का विशिष्ट विधान चला। प्रतिदिन अलग-अलग यजमान बैठे । रक्षाबंधन के पवित्र दिवस पर बा द्वारा मुझे भी सपत्नीक पार्थिव पूजा का अवसर दिया गया । पूजा के दौरान मैंने पार्थिव लिंगों में सद्गुरु शिव का जो साकार दृश्य देखा वही शब्दबद्ध करके प्रस्तुत कविता के रूप में प्रस्तुत है ।

मैंने शिव चलते देखा है
पता नहीं था मुझे कि मेरी,
किस्मत में ऐसी रेखा है ।
मैंने शिव चलते देखा है ।
मैंने शिव चलते देखा है ॥

साधक पर जब-जब भी कोई,
संकट की बेला आई तो,
करुणा से परिपूरित होकर,
कण- कण करके इस शंभू को,
इन आँखों गलते देखा है ।
मैंने शिव चलते देखा है ॥

चाहे किसी ने अपना माना,
भले किसी ने मारा ताना,
पर निर्लिप्त रहा जीवनभर,
इस विषपायी नीलकण्ठ को,
परहित में जलते देखा है ।
मैंने शिव चलते देखा है ॥

एक बार तो यम भी आए,
उलटे पाँव उसे लौटाए,
ले त्रिशूल खडा हो जाए,
इस शंकर के ताण्डव  भय से,
मृत्यु को टलते देखा है ।
मैंने शिव चलते देखा है ॥

कितने हीन-दीन को तारा,
कितनों को मिल गया सहारा,
परम्परा में जो भी आया,
इस कैलासी की गोदी में,
खुशी-खुशी पलते देखा है ।
मैंने शिव चलते देखा है ॥

………वरदीचन्द राव

पूर्वप्रसिद्धी शिवप्रवाह- अगस्त 2009
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2 responses to “मैंने शिव चलते देखा है ….व. राव.

  1. Chandan Ba Mestry THANE MH INDIA

    अगस्त 16, 2011 at 10:30 पूर्वाह्न

    JAY SHREE KRISHNA RANI TAI

     
  2. प्रो प्रकाश

    अगस्त 14, 2011 at 11:16 अपराह्न

    मैने शिव चलते देखा है।
    दत्त स्वरूप प्रगटते देखा है।

     

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