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गुरुमंत्रं सदा जपेत् ।

08 जनवरी

हम हरिहर को पूजें, गणेश की वंदना करें या अपने ईष्ट भगवान की आराधना करें। शास्त्रों, विद्वानों व प्रवर्तकों ने सभी में एक ही तत्त्व कहा है। पूजा के अपने-अपने विधिविधान है, ढंग है, परम्पराएं है, मान्यताएं है पर इससे भिन्नता प्रमाणित नहीं होती। इन्हीं शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु व महेश है, वही साक्षात परब्रह्म है। इन दोनों बातों में कोई विरोधाभास नहीं है। जब हम सद्गुरु वंदन करते है तो वह सभी देवताऒं तक भी जाता है और जब हम देवार्चन करते है तो वह सद्गुरु तक भी पहुंचता है। बस अंतर यही है कि सद्गुरु प्रत्यक्ष है और देव अप्रत्यक्ष । देव सद्गुरु है और सद्गुरु देव, यही उनका अंतर्सम्बंध है। जो इस रहस्य को समझा वही साधक बन जाता है।….व, राव
पूर्वप्रसिद्धि- शिवप्रवाह सितम्बर 2011.

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One response to “गुरुमंत्रं सदा जपेत् ।

  1. pankaj2011patel

    जनवरी 9, 2012 at 2:00 पूर्वाह्न

    jay shree krishna

     

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