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मेरा सद्गुरु शिव..श्री. वरदीचंद राव.

06 अगस्त

मैंने केवल आक धतूरे, तुझे चढ़ाये कैलासी।
तुमने माने हीरे-मोती, बसा लिया अपनी काशी।
तुमने करुणासिंधु बनकर, कितनी लहर मुझे नहलाया।
आतप तुमने भले सहा है, सुलभ कराई मुझको छाया।
शंकर तुमको लगी समाधि, तब भी मैं डमरु सुनता था,
मेरे मनमन्दिर में शिवजी, तुमको किसने कहो बिठाया?
शिव तुम मुझको शक्ति बनादो, स्वीकारो अपनी निज दासी॥
जटाजूट है गंगासागर, इसकी उद्गम धार कहां है?
तीनों लोक छान लें फ़िर भी, शंभु तेरा पार कहां है?
तेरा ताण्डव हे नटनागर, हर साधक का दुर्गुणहारी,
कितने ही अज्ञानी तारे, तुमको इसका भार कहां है?
शिव सद्गुरु की रहमत पाकर, उगती खुशियां-अस्त उदासी॥

(शिवरात्री पर व. राव द्वारा रचित व श्री, संजय पवार द्वारा प्रस्तुत भजन)
पूर्वप्रसिद्धी शिवप्रवाह March 2012

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One response to “मेरा सद्गुरु शिव..श्री. वरदीचंद राव.

  1. Sunil Nahar

    अगस्त 27, 2012 at 5:19 अपराह्न

    Om Shree Swami Samarth | Swami Ki Jai | Jya Sangtinech Virag Zala, Visru Kasa Mi Guru PaduKla | Jai Shankar |

     

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