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चैतन्य दिवस पर भाव समर्पण

06 जनवरी

 Raosaheb- Chaitanya Divas

अपने वासुदेव कुटुम्ब का भवन
स्नेह, समता, साधन और समर्पण के
चार स्तंभों पर टिका है।
जिसकी एक-एक ईंट पर
सद्गुरु सुगंधेश्वर लिखा है।
स्नेह, समता, साधन और समर्पण
मात्र शब्द नहीं है वरन
परम्परा की देशनाएं हैं।
ये सद्गुरु सूरज के जेहन से
उद्घाटित मंत्र है
ये सिद्धिदात्री पुनीत ऋचाएं हैं।
यहां स्नेहमयी प्राची से
समता का सूरज चलता है।
साधन – पथ पर चलते – चलते,
समर्पण की गोद में ढलता है।
इतनी यात्रा तो सर्वज्ञात है,
पर रात को सूरज कहां होता है?
सूरज तब भी किसमें व्यस्त रहता है,
जब सारा संसार सोता है।
मेरा प्यारा सद्गुरु सूरज,
नींद के आगोश में डूबे
अनुग्रहीतों के दिल से करता है
कषायों की सफ़ाई।
उसके कदमों की आहट से प्रकटते हैं
भजन, गीत, गजल और रुबाई।
साधक के
दु:खों के अम्बार को भस्म कर
वो सुख की किरणें बिखराता है।
दीक्षित साधक में
देखने की क्षमता बो आता है।
ताकि साधक देख सके
भूत, भविष्य और वर्तमान।
सूरज सुझा देता है
सभी समस्याओं के समाधान।
सुसुप्त साधक के मन में
फ़ड़फ़ड़ाने लगते हैं आनंद के डैने।
वाह, सद्गुरु तुम्हारे क्या कहने!
जाग्रत होकर
सारे घटनाक्रम से अनज़ान साधक
जब सद्गुरु के दर्शन पाता है।
सद्ग्रुरु-सूरज मंद-मंद मुस्काता है।
पूछता है–कैसे हो आत्मन्?
कैसा चल रहा है साधन?
सब ठीकठाक तो है ना?
सभी को जय श्री कृष्ण कहना।
साधकों पर आने वाले न जाने
कितने घात-प्रतिघात
मेरे सद्गुरु झेल जाते हैं।
कितने ही साधक तो
यह भी नहीं जानते कि
सद्गुरु अनुकम्पा से वे अपने
एक -एक दिन का
जीवन खेल, खेल पाते हैं।
इतना होने पर भी
कहीं भी नहीं छलक पाता इनके
तारक रुप के प्रदर्शन है।
जिसे दुनिया ठुकरा दे
उसे अपनाना, अपने जैसा बनाना
यही मेरे प्रभु का दर्शन है।
…वरदीचन्द राव द्वारा नागपुर में आयोजित चैतन्य-दिवसपर सद्गुरु चरणारविन्द में समर्पित रचना.
पूर्वप्रसिद्धी जनवरी २०१२, शिवप्रवाह

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1 टिप्पणी

Posted by on जनवरी 6, 2013 in नवीन

 

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One response to “चैतन्य दिवस पर भाव समर्पण

  1. Sudhindra upadhayay

    जनवरी 6, 2013 at 7:39 अपराह्न

    Param pujai parmhansa parbhu baa ko shat shat paranam

     

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