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मधुलिका सिंह की अभिव्यक्ति

07 जनवरी

madhulika poem

मधुलिका सिंह की अभिव्यक्ति (गद्य)
बा,
चैतन्य दिवस पर खाली हाथ आई थी, मन भी रीता…बस एक कार्ड ले गई थी। उसमें भी लिखने को उचित विचार नहीं आ रहे थे। जब आपकी तस्वीर के सामने बैठी तो कुछ आधे-अधूरे, धुंधले विचार आने लगे, पर जाप कर रही थी इसलिए अधिक सोच-विचार नहीं कर सकी। दो तीन दिनों में विचार कुछ स्पष्ट हुए, उनको व्यक्त करने का प्रयत्न है ये। आप तो अंतर्यामी है, सब कुछ जानती हैं, फ़िर भी….। दीक्षा नहीं हुई है तो भी हर क्षण मेरा मार्गदर्शन करते हुए, मेरा जीवन उन्नत कर रही हैं आप। अपने पास बुलाने की सारी व्यवस्था कर दी, मैं तो कृतज्ञता से नतमस्तक हूँ। जल्दी ही दर्शन की आशा में।
आपकी मधुलिका
(पद्य)
चैतन्य दिवस पर बा आपको हार्दिक बधाई।
आपने कहा था –नहीं चाहिए मेवा –मिठाई,
बस गहरा -गहरा ध्यान करो भाई।
उसी में है सबकी भलाई,
आपस में बनकर रहो सहाई, न हो अनबन, न हो लडाई।
चैतन्य दिवस पर आई हूँ खाली हाथ,
कुछ नहीं है साथ..न भोज न पकवान।
प्रभु ऐसा दो वरदान, खूब गहरा हो ध्यान।
आपका ही वरदान, फ़िर आपको करुं अर्पण,
और मेरा हो कल्याण।
कर्मों से, वाणी से और विचारों से करुं गुरु की जय।
चैतन्य माँ, मेरा मोक्ष हो निश्चय।
अब हो गया है उचित समय।
जो कोमल हाथ देते हैं आशीर्वाद।
वही दण्ड देते हैं बनकर कठोर जब मन करे वाद-विवाद ।
अंधेरे में जब न मिले भोर, वही हाथ बनकर जगन्नाथ
पहुँचाते उस छोर।
चैतन्य दिवस पर आई हूँ खाली हाथ,
कुछ नहीं है साथ..न फ़ूल न फ़ल।
प्रभु, ऐसा करो निर्मल, मन हो गंगाजल।
उसी गंगाजल से करुं आपका पादुका-प्रक्षालन।
जीवन बने खिला कमल।
दुर्बलताऒं का हो क्षय,मृत्यु -जर-रोग से होऊं अभय।
चैतन्य माँ, मेरा मोक्ष भी हो निश्चय।
—–कॅलिफ़ोर्निया से सम्प्रेषित सद्गुरु के चरणों में शब्दार्पण.
पूर्वप्रसिद्धी–शिवप्रवाह जनवरी २०१२.

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Posted by on जनवरी 7, 2013 in नवीन

 

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