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Tag Archives: शिवप्रवाह जनवरी -फ़रवरी २०१४

शिव ने सद्गुरु रूप है धारा — व. राव

feb14-2

सद्गुरु क्या संबंध हमारा?
जो बिनु साधन हमको तारा।
कूड़े- कर्कट से चुन-चुन के,
झाड़ -पोंछकर हमें उठाया।
हमको ठौर कहाँ मिल पाती,
पर तुमने दिल में बैठाया ।
कहाँ पड़े थे पग-पग लाले,
बिन माँगे दे दिया सवाया।
एक कदम भी चल नहीं पाए,
फ़िर भी तुमने खूब निभाया।
जाने कैसा पुण्योदय जो, मिला हमें है सबलसहारा॥….
सुनते-पढ़ते रहे खूब हम,
बड़ी विलक्षण सद्गुरु माया।
लेकिन जबसे तुमको देखा,
अर्थ समझ में तब ही आया।
तेरे बल पर हमने सद्गुरु,
चींटी होकर गिरि उठाया।
श्रम करते तो दीखे हम सब,
लेकिन तुम्हें पसीना आया।
तुमने खूब तराशा हमको, हर पहलु से हमें संवारा॥…..
लुका-छिपी का खेल कहाँ तक,
खेलोगे हमसे गुरुराया।
क्यों नहीं कहते फ़िर प्रकटा हूँ,
साधक के सिर करने छाया।
एक-एक साधक चुन-चुन के,
बुला-बुला कर गलें लगाया।
क्यों स्वीकार नहीं कर लेते,
जान गई अब सारी दुनिया, शिव ने सद्गुरु रूप है धारा॥
सद्गुरु यह संबंध हमारा॥

–वरदीचन्द राव.

चैतन्य दिवस पर रावसाहाब की अभिव्यक्ती

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